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Kafan Ke Ahkaam Bayan - कफ़न ये एक मोमिन मुस्लमान का आखिर लिबास होता हैं जिसे पहन कर वो अपने असली घर में कबर में दफ़न हो जाता हैं और अल्लाह से जा मिलता हैं अब भले ही वो दुनिया में रहकर मंहगे महंगे कपडे छोड़ जाता हैं जो दुनिया में उसके बगैर वह घर के बहार नहीं निकल पता था। मगर मौत का जाम पिने के बाद वो एक कपडे में अपने घर से निकला जाता हैं
जिस तरह हम दुनिया में रहकर कपड़ो की मालूमात और फैशन का ख्याल रखते हैं और नए नए फैशन में अपने आप को ढलने के लिए उन कपड़ो की हर मालूमात जानकारिया मालूम हासिल करते हैं इस चक्कर में हम अपने नबी की सुन्नत कपड़ो वाली तर्क कर देते हैं जब की हमें ये सब छोड़ कर जाना होता हैं
उसी तरह हमें अपने आखिर कपडा कफ़न Kafan की भीं ज़िन्दगी में रहकर मालूमात कर लेना चाहिए और अपने रिश्तेदारों और अज़ीज़ो को ये मालूमात बताना चाहिए की मैं जब इस दुनिया से जाऊ तो मेरे कफ़न का इस तरह मुझे पहना कर अलविदा देना।
तो आइये कफ़न के अहकाम और बयांन Kafan Ke Ahkaam जानते हैं
कफ़न अच्छा होना चाहिये या'नी मर्द इदैन व जुमुआ के लिये जैसे कपड़े पहनता था और औरत जैसे कपड़े पहन कर मैके जाती थी उस कीमत का होना चाहिये । हदीस में है , मुर्दो को अच्छा कफ़न दो कि वोह बाहम मुलाकात करते और अच्छे कान से तफाखुर करते या'नी खुश होते हैं ।
सफेद कफ़न Kafan बेहतर है कि नबिय्ये अकरम सल्लल्लाहो अलैवसल्लम ने फ़रमाया : अपने मुर्दे सफ़ेद कपड़ों में कफ़नाओ ।
पुराने कपड़े का भी कफ़न हो सकता है , मगर पुराना हो तो धुला हुवा हो कि कफन सुथरा होना मरगूब है ।
कफ़न अगर आबे ज़म ज़म या आबे मदीना बल्कि दोनों से तर किया हुवा हो तो सआदत है ।
मोमिन के मय्यत को कफ़न Kafan के तीन कपडे जरुरी हैं, जिसे लुंग , कमीस और चादर कहते हैं
( मदनी वसिय्यत नामा , स . 4 )
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| Kafan Ke Ahkaam Bayan |
कफन की तफ्सील ( Kafan Ke Ahkaam )
1 ) लिफ़ाफ़ा : या'नी चादर मय्यित के कद से इतनी बड़ी हो कि दोनों तरफ़ से बांध सकें ।
2 ) इज़ार : ( या'नी तहबन्द ) चोटी ( या'नी सर के सिरे ) से क़दम तक या'नी लिफाफे से इतना छोटा जो बन्दिश के लिये जाइद था ।
3 ) कमीस : ( या'नी कफनी Kafan ) गर्दन से घुटनों के नीचे तक और येह आगे और पीछे दोनों तरफ बराबर हो इस में चाक और आस्तीनें न हों । मर्द की कफ़नी कन्धों पर चीरें और औरत के लिये सीने की तरफ़ ।
4 ) सीनाबन्द : पिस्तान से नाफ़ तक और बेहतर येह है कि रान तक हो ।
5 ) ओढ़नी : तीन हाथ होनी चाहिये या'नी डेढ़ गज़ ।
( बहारे शरीअत , हिस्सा 4 , 1/818 )
6 ) उमूमन तय्यार कफ़न Kafan ख़रीद लिया जाता है उस का मय्यित के कद के मुताबिक मस्नून साइज़ का होना ज़रूरी नहीं , येह भी हो सकता है कि इतना ज़ियादा हो कि इसराफ़ में दाखिल हो जाए , लिहाजा एहतियात इसी में है कि थान में से हस्बे ज़रूरत कपड़ा काटा जाए ।
( मदनी वसिय्यत नामा , स .11 , हाशिया , 1 )
ये जरुरी और छोटी से मालूमात आप नमाज़ ए जनाज़ा के पहले मय्यत को कफ़न के कुछ कफ़न के अहकाम Kafan Ke Ahkaam हैं इसे पढ़े याद करे और इसाले सवाब के नियत से शेयर करे किसी मरहूम के मय्यत को सवाब पहुंचने के नियत से। अस्सलामु अलैकुम
नमाज़ ए जनाज़ा मुतफर्रिक़ Namaz E Janaza Mutfarrik की बात करे तो कुछ ऐसी बाते जो मय्यत के लिए बहुत जरुई हैं. मय्यत को निलहाते और लिटाते या डोले में जिसमे मय्यत को लेके जाते हैं उसमे मय्यत को किस तरह रखना ये सब मय्यत के लिए बहुत जरुरी हैं बहुत एहम हैं
तो आइये जानते हैं नमाज़ ए जनाज़ा मुतफ़र्रिक़ Namaz E Janaza Mutfarrik की जरुरी मालूमात जो हर मोमिन शायद ही जनता हैं
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( दारुल इफ्ता अहले सुन्नत )
इस तरह नमाज़ ए जनाज़ा मुतफ़र्रिक़ Namaz E Janaza Mutfarrik हैं जो हर सुन्नी अक़ीदा मोमिन के मय्यत में अमल करना चाहिए और मय्यत को राहत का सबब बनना चाहिए। इसे पढ़े याद रखे और अमल करे और जरुरी बात इसे शेयर करे इसाले सवाब के नियत से. अस्सलामु अलैकुम
मय्यित को कफन पहनाना कारे सवाब है और कई अहादीसे मुबारका में कफ़न पहनाने वाले के लिये जन्नती हुल्लों और नफीस रेशमी लिबासों की बीशारत दी गई है चुनान्चे , एक हदीसे मुबारका मुलाहा फरमाइये
कफ़न अच्छा होना चाहिये या'नी मर्द इदैन व जुमुआ के लिये जैसे कपड़े पहनता था और औरत जैसे कपड़े पहन कर मैके जाती थी उस कीमत का होना चाहिये । हदीस में है , मुर्दो को अच्छा कफ़न दो कि वोह बाहम मुलाकात करते और अच्छे कान से तफाखुर करते या'नी खुश होते हैं ।
सफेद कफ़न बेहतर है कि नबिय्ये अकरम सल्लल्लाहो अलैवसल्लम ने फ़रमाया : अपने मुर्दे सफ़ेद कपड़ों में कफ़नाओ ।
पुराने कपड़े का भी कफ़न हो सकता है , मगर पुराना हो तो धुला हुवा हो कि कफन सुथरा होना मरगूब है ।
कफ़न अगर आबे ज़म ज़म या आबे मदीना बल्कि दोनों से तर किया हुवा हो तो सआदत है ।
( मदनी वसिय्यत नामा , स . 4 )
हज़रते सय्यिदुना अबू उमामा RA से रिवायत है कि नूर के पैकर , तमाम नबियों के सरवर सल्ललाहोअलेवास्सलम ने फ़रमाया : जिस ने किसी मय्यित को कफ़नाया ( यानी कफ़न पहनाया ) तो अल्लाह उसे सुन्दुस का लिबास ( जन्नत का इन्तिहाई नफ़ीस रेशमी लिबास ) पहनाएगा ।
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कफ़न के तीन दरजे हैं :
1 ) ज़रूरत
2 ) किफ़ायत
3 ) सुन्नत
कफने ज़रूरत मर्द व औरत दोनों के लिये येह कि जो मुयस्सर आए और कम अज़ कम इतना हो कि सारा बदन छुपा दे ।
कफ़ने किफ़ायत मर्द के लिये दो कपड़े हैं :
1 ) लिफ़ाफ़ा
2 ) इज़ार
1 ) लिफ़ाफ़ा
2 ) इज़ार
3 ) ओढ़नी
या
1 ) लिफ़ाफ़ा
2 ) कमीस
३ ) ओढ़नी
( बाहारे शरीअत , हिस्सा 41 / 817 )
मर्द के लिये कफ़्ले सुन्नत तीन कपड़े हैं
1 ) लिफाफ
2 ) इज़ार
3 ) कमीस
1 ) लिफाफा
2 ) इज़ार
3 ) कमीस
4 ) सीनाबन्द
5 ) ओढ़नी
( बहारे शरीअत , हिस्सा 4,1 / 817 )
खुन्शा मुश्किल ( या'नी जिस में मर्द व औरत दोनों की अलामात हों और येह साबित न हो कि मर्द है या औरत ) को औरत की तरह पांच कपड़े दिये जाएं मगर कुसुम या जाफ़रान का रंगा हुवा और रेशमी कफ़न उसे नाजाइज़ है ।
जो ना बालिग हद्दे शहवत को पहुंच गया वोह बालिग के हुक्म में है या'नी बालिग को कफ़न में जितने कपड़े दिये जाते हैं उसे भी दिये जाएं और इस से छोटे लड़के को एक कपड़ा और छोटी लड़की को दो कपड़े ( लिफाफा और इज़ार ) दे सकते हैं और लड़के को भी दो कपड़े ( लिफ़ाफ़ा और इज़ार ) दिये जाएं तो अच्छा है और बेहतर यह है कि दोनों को पूरा कफन दें अगचें एक दिन का बच्चा हो ।
1 ) लिफ़ाफ़ा : या'नी चादर मय्यित के कद से इतनी बड़ी हो कि दोनों तरफ़ से बांध सकें ।
2 ) इज़ार : ( या'नी तहबन्द ) चोटी ( या'नी सर के सिरे ) से क़दम तक या'नी लिफाफे से इतना छोटा जो बन्दिश के लिये जाइद था ।
3 ) कमीस : ( या'नी कफनी ) गर्दन से घुटनों के नीचे तक और येह आगे और पीछे दोनों तरफ बराबर हो इस में चाक और आस्तीनें न हों । मर्द की कफ़नी कन्धों पर चीरें और औरत के लिये सीने की तरफ़ ।
4 ) सीनाबन्द : पिस्तान से नाफ़ तक और बेहतर येह है कि रान तक हो ।
5 ) ओढ़नी : तीन हाथ होनी चाहिये या'नी डेढ़ गज़ । ( बहारे शरीअत , हिस्सा 4 , 1/818 )
उमूमन तय्यार कफ़न (kafan ka bayan) ख़रीद लिया जाता है उस का मय्यित के कद के मुताबिक मस्नून साइज़ का होना ज़रूरी नहीं , येह भी हो सकता है कि इतना ज़ियादा हो कि इसराफ़ में दाखिल हो जाए , लिहाजा एहतियात इसी में है कि थान में से हस्बे ज़रूरत कपड़ा काटा जाए । ( मदनी वसिय्यत नामा , स .11 , हाशिया , 1 )
( १ ) जुरुरी
( २ ) किफायत
( ३ ) सुन्नत / Sunnati
मर्द के लिये कफ़न सुन्नत Kafan Sunnati तीन कपड़े हैं , लिफाफा , एजार , कमीज और औरत के लिए कफने सुन्नत Sunnati पांच कपड़े हैं लिफाफा , एजारकमीज़ , मोदनी और सीना बन्द ।
कफने किफायत मर्द के लिए दो कपड़े हैं लिफाफा व एजार औरत के लिए कफन Kafan किफायत तीन कपड़े हैं लिफाफा , एजार , ओढ़नी या लिफाफा , कमीज , ओढ़नी।
कफने Kafan जुरुरत मर्द औरत दोनों के लिये जो मयस्सर आए और कम से कम इतना तो हो कि सारा बदन ढ़क जाए ।
( आलमगीरीवगैरह )